फोटोगैलरी


भाखड़ा बांध


विरिजन भाखड़ा जॉज


नव युग का प्रारम्‍भ
एक मुख्‍य जांच और भूमि कार्य के बाद बांध के निर्माण का निर्णय लिया गया था और वर्ष 1948 में जॉज ने भाखड़े की ओर 15.24 (50 फीट) ब्‍यास की प्रत्‍यावर्तन सुरंग ( डाइवर्जन टनल) के पायलेट हैंडिगस के नये कार्य का आरम्‍भ किया गया और भारत के प्रथम प्रधान मंत्री पण्डित जवाहर लाल नेहरू ने 17 नवम्‍बर, 1955 को कंकरीट की पहली बाल्‍टी बांध स्‍थल पर रखी। प्रत्‍येक बाल्‍टी में आठ टन कंकरीट लाया गया तथा कार्य वर्षो तक दिन-रात चलता रहा।


भाखड़ा का रात का नजारा
740 फुट ऊंचा अदभुत स्‍मारक अभियांत्रिकी की अवधारणा, डिजाइन न तथा क्रियान्‍वयन की एक श्रेष्‍ठ कृति है। बांध के निर्माण हेतू प्रयोग की गई कंकरीट की मात्रा भूमध्‍य रेखा पर धरती के चारों ओर 8 फुट चौड़ी सड़क बनाने के लिए पर्याप्‍त है। परियोजना के दांया तथा बांया विद्युत संयंत्रों की शीर्ष विद्युत उत्‍पादन क्षमता 1325 मेगावाट है। ऊचे पर्वतों के बीच स्थित भाखड़ा का रात का नजारा ताज महल तथा विश्‍व के अन्‍य अजूबों के समान लुभाना लगता है।


मशीन हाल


भाखड़ा बांध का अपस्‍ट्रीम नजारा


भाखड़ा बांध का डाऊन्‍स्‍ट्रीम नजारा
भाखड़ा बांध शीर्ष पर संकरी घाटी में 518.16 मी. (1700 फुट) लम्‍बा बना हुआ है। बाढ़ के पानी की निकासी के लिए 79.25 मीटर (260 फुट) लम्‍बे ओवर फलो स्पिलवे, जिसका नियंत्रण चार रेडियल द्वारा किया गया है, का प्रावधान किया गया है1 सिंचाई प्रवाह को बढ़ाने के लिए 16 मीटर रिवर आऊटलेटस प्रयोग किए जाते हैं। ओवर फलो स्पिलवे तथा रिवर आऊटलेट एक साथ मिलकर 8212 क्‍यूमेक्‍स ( 2,90,000 क्‍यूमेक्‍स) बाढ़ जल को डिस्‍चार्ज कर सकते है।


गंगूवाल विद्युत गृह


कोटला विद्युत गृह
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