Bhakra Beas Management Board BBMB - The Board

भाखड़ा ब्यास प्रबन्ध बोर्ड

आई.एस.ओ. 9001, 14001 प्रमाणित बोर्ड 

 

  सुलभता विवरण  English

   संपर्क करें 

पर्यावरण संरक्षण

Bhakra
भाखडा बांध राष्‍ट्र गौरव
बीबीएमबी के प्रयास ......
  • जल से विद्युत उत्‍पन्‍न करना-ऊर्जा का अत्‍यघिक नवीनीकरण स्‍तोत्र।
  • सिंचाई एवं पीने के लिए स्‍वच्‍छ जल की आपूर्ति।
  • पारिस्थितिक संतुलन का अनुरक्षण प्रचलित अन्‍तर्राष्‍ट्रीय/राष्‍ट्रीय मानकों, कार्य प्रणाली, प्रौद्योगिकी तथा विधि के अनुसार पर्यावरणीय पतन का निवारण करना ।

 

पर्यावरण प्रबनधन के अन्‍तर्गत बीबीएमबी की उपलब्धियां :-


पारिस्थितिक सुधार
  • उपर्युक्‍त पर्यावरणीय उद्देश्‍य, लक्ष्‍य निर्धारित करना और पर्यावरण के निरन्‍तर सुधार सुनिश्चित करते हुए पर्यावरण प्रबन्‍ध योजना के अनुसार इन लक्ष्‍यों को प्राप्‍त करना ।

  • बी.एस.एल परियोजना से गाद के सुरक्षित निपटान हेतु एन.ई.ई.आर.आई रिपोर्ट को लागू करने के लिए अध्‍ययन प्रारम्‍भ करना।

  • लोगों की समस्‍याओं/शिकायतों का समाधन करने तथा उनके साथ सौहार्दपूर्ण सम्‍बन्‍ध बनाने के लिए पर्यावरणीय परियोजनाओं के पण-धारकों के साथ नियमित बैठकें करने के लिए मुख्‍य अभियन्‍ताओं को दिशा-निर्देश देना।

  • पेयजल, उपचार संयंत्रों, सीवेज उपचार संयंत्रों आदि के कार्य निष्‍पादन की जांच करने के लिए गाद विश्‍लेषण, रसायन तथा जीवाणु-विज्ञान परीक्षण करने के लिए सभी परियोजना स्‍टेशनों पर पूर्ण सुसज्जित केन्‍द्रीय प्रयोगशालाओं की स्‍थापना करना।

  • बीबीएमबी की अतिरिक्‍त भूमि में पार्कों, नर्सरियों और बगीचों का विकास तथा ग्रीन बेल्‍ट की पहचान करना।

  • ड्रेनों, आपूर्ति लाइनों, निकासी लाइनों आदि के रिसाव को रोकने के लिए सड़कों के साथ-साथ अधिक्रमणों को चैक करना।

  • आवाह क्षेत्र उपचार तथा फ्रिंज क्षेत्र उपचार योजनाएं तैयार करना तथा हिमाचल प्रदेश सरकार प्राधिकारियों के साथ समन्‍वय करके योजनाएं क्रियान्वित करना।

  • पर्यावरण क्षेत्र में नवीनतम दिशा-निर्देशों, नवीकरणों, हिदायतों के लिए हिमाचल प्रदेश तथा केन्‍द्रीय प्रदूषण नियन्‍त्रण बोर्डों के साथ सम्‍पर्क बनाएं रखना।

  • बीबीएमबी कर्मचारियों को अपने/कॉलोनियों के चारों और अधिक से अधिक वृक्ष/पौधे लगाने के लिए उनमें जागरूकता कार्यक्रम प्रारम्‍भ करना।

  • सम्‍मेलनों में भाग लेना, उठाए गए कदमों तथा उनसे प्राप्‍त हुए लाभों से सम्‍बन्धित पेपर प्रकाशित करना और यदि आवश्‍यक हो तो पायलट अध्‍ययन करना।

  • आई.एस.ओ. 14000 प्रमाणीकरण, जिसके लिए कार्यवाई प्रारम्‍भ की गई है, वाले विद्युत संयंत्रों तथा परियोजना कॉलोनियों का पर्यावरणीय उन्‍नयन।

  • पर्यावरणीय क्षेत्र में परियोजना के बाहरी क्षेत्र में सामाजिक सेवाऐं ।

बांध जल का प्रबन्‍धन करने में मदद करते हैं :-

जल एक प्राकृतिक स्‍त्रोत हैं। इसके बिना लोग जीवित नही रह सकते। पांच हजार से अधिक वर्षो से बांधो ने लोगो को जल, जिसकी उन्‍हे जीवित रहने के लिए आवश्‍यकता हैं, उपलब्‍ध करवाएं हैं। आज बांधो ने लोगो को इस योग्‍य बनाया है कि वे जब पानी पर्याप्‍त होता हैं जो इसका संग्रह कर सके और इसका प्रयोग शुष्‍क अवधि के दौरान कर सके। आज बांध और जलाशय बाढ़ के पानी पर नियन्‍त्रण करके लोगों और उनकी सम्‍पत्ति सुरक्षित करतें हैं तथा कस्‍बों, गांवो और फैक्‍टरियों के लिए नवीकरण ऊर्जा से विद्युत उपलब्‍ध करवातें हैं। ये मत्‍स्‍य पालन, जल खेलकूद इत्‍यादि जैसी मनोरंजक सुविधाएं भी उपलब्‍ध करवातें हैं।

जल विद्युत- द ग्रीन पावर

आज 45000 से अधिक बृहत बांध विश्‍व की जनसंख्‍या, प्रतिवर्ष 100 मिलियन से अधिक की दर से लोगों में वृद्वि होती है, के जीवन का सुधार करतें हैं। लगभग 15 बिलियन लोगों के पास अभी तक पेयजल का विश्‍वसनीय स्‍त्रोत नही हैं तथा दो दर्जन से अधिक देशों के पास अपनी जनसंख्‍या के उचित रख रखाव हेतु पर्याप्‍त जल नही हैं। आज एक बिलियन से अधिक लोग कुपोषण अथवा भुखमरी से ग्रस्‍त है। कई देशों में, खाद्य उत्‍पादन में वृद्वि केवल उन्‍नत सिचांई के माध्‍यम से ही सम्‍भव है, जो लगातार कम भू- जल संसाधनों को कम रहे हैं। अत: वर्तमान सजही जल संसाधनों की व्‍यवस्‍था का सुधार करने के लिए भविष्‍य में अधिक बांधों की जरूरत हैं।

प्रकृति के सामाजिक- आर्थिक विकास हेतु ऊर्जा की उपलब्‍धता आवश्‍यक है। आज ऊर्जा की अधिकतर आपूर्ति फोसिल जो स्‍त्रोत है। जल विद्युत विश्‍व में कुल ऊर्जा उत्‍पादन का लगभग 7% तथा विद्युत उत्‍पादन का लगभग 20% है। जल विद्युत स्‍वच्‍छ है तथा पर्यावरण में हानिकारक प्रभावों के बिना वर्तमान परियोजनाओं से उत्‍पादन को बढाया जा सकता हैं। फिलहाल, जल विद्युत ऊर्जा का विस्‍तृत नवीकरणीय स्‍त्रोत है। दूसरे शब्‍दों में, बांधों से बना जल विद्युत उत्‍पादन विस्‍तृत विकास हेतु ऊर्जा उपलब्‍ध करवानें के लिए एक मुख्‍य स्‍त्रोत है।

बांध घरेलू तथा निजी आवश्‍यकताओं की पूर्ति हेतु जल, ऊर्जा, सिंचाई तथा औद्योगिक प्रयोग के लिए जल, बाढ़ नियंत्रण तथा मनोरंजनात्‍मक सुविधाएं उपलब्‍ध करवाते है, परन्‍तु किसी मूल्‍य पर। विश्‍व की बढ़ रही जनसंख्‍या को उत्‍तम जीवन उपलब्‍ध करवाने से अभिप्राय है कि हम प्राकृतिक पर्यावरण में परिवर्तन लाएं। प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किया जाएगा तथा पर्यावरण भी मानवीय आवश्‍यकताओं की पूर्ति हेतु बदल जाएगा। जब बांध ओर जलाशय बनाए जाते हैं तो लोग और उनके जीवन के अन्‍य तरीके भी अनिवार्य रूप से प्रभावित होते है। अभियन्‍ताओं को जल परियोजनाओं के कारण होने वाली पर्यावरणीय क्षति को बचाना अथवा कम करना चाहिए।

लोगों की जल और ऊर्जा की तात्‍कालिक आवश्‍यकताओं को पूरा करने के लिए ऐतिहासिक रूप से प्राथमिक दी गई। आज, हम प्राकृतिक पर्यावरण के महत्‍व तथा प्रदूषण के विरूद्व दीर्घकालीन सुरक्षा का आवश्‍यकता को समझते हैं। बीबीएमबी के व्‍यावसायिक अभियन्‍ताओं का विश्‍वास है कि हमें मानव की तात्‍कालीन आवश्‍यकताओं को पूरा करने के लिए बांधों और जलाशयों की व्‍यवस्‍था करते समय भी दीर्घकालीन लाभों के लिए पर्यावरण को सुरक्षित रखना चाहिए।


पर्यावरण प्रबन्‍धन

भारत विशेषकर उत्‍तरी भारत के जल संसाधन भाखड़ा-ब्‍यास परियोजना जैसी नदी घाटी विकासात्‍मक परियोजनाओं के माध्‍यम से सामान्‍यत: देश की समृद्वि में महत्‍वपूर्ण योगदान दे रहें हैं।

पर्यावरण प्रदूषण के लिए महत्‍व एक नया चमत्‍कार है, जो योजना प्रकिया के माध्‍यम से औद्योगिक विकास के दुष्‍प्रभावों से उभरा है जिस पर विकासात्‍मक गतिविधियों में प्राकृतिक संसाधनों की भूमिका पर किसी तरह का ध्‍यान नही दिया गया। वर्षो से नदी घाटी परियोजनाओं की कार्यशैली के दौरान एकत्रित की गई सूचना से यह पता चलता हैं कि अन्‍य विकासात्‍कम परियोजनाओं की तरह नदी घाटी परियोजनाएं लाभकारी रही हैं, परन्‍तु इनके प्रतिकूल प्रभाव भी पड़े हैं। इन प्रभावों का सावधनीपूर्वक आंकलन करना चाहिए तथा लाभ लगातार प्राप्‍त करने के लिए संतुलन बनाए रखना चाहिए। सिंचाई, विद्युत तथा बहुउद्देशीय सभी नदी घाटी परियोजनाएं पर्यावरण क्लियरेन्‍स हेतु भारत सरकार को 1978 में भेजनी प्रारम्‍भ की गई। पर्यावरणीय प्रभावों के आंकलन करने का लक्ष्‍य यह सुनिश्चित करना है कि विकास के साथ-साथ पारिस्थितिक संरक्षण बढे।

पर्यावरण सम्‍बन्‍धी पहलुओं को विकासात्‍मक परियोजनाओं के एकीकृत भाग के रूप में मानने का उददेश्‍य निम्‍नलिखित को प्राप्‍त करना हैं :-

  • न्‍यूनतम पर्यावरण प्रभावों के साथ लगातार विकास।
  • दीर्घकालीन पर्यावरण सम्‍बन्‍धी साइड प्रभावों का न्‍यूनीकरण उपाय अपनाकर निवारण करना। बीबीएमबी परियोजनाओं में पर्यावरण प्रबन्‍धन।



बीबीएमबी परियोजनाओं में पर्यावरण प्रबन्‍धन

बीबीएमबी द्वारा संचालित सभी तीन घाटी परियोजनाओं यथा भाखड़ा-नंगल, बीएसएल परियोजना तथा ब्‍यास बांध परियोजना की योजना तथा इनका क्रियान्‍वयन 1978 से पहले किया गया था जब सरकार से पर्यावरण सम्‍बन्‍धी स्‍वीकृति लेना अनिवार्य नही था।

बीबीएमबी परियोजनाओं के ई आई ए अध्‍यनों से पता चलता हैं कि बीबीएमबी परियोजनाओं के नकारात्‍मक प्रभावों की तुलना में लाभकारी प्रभाव काफी अधिक हैं। भाखड़ा और ब्‍यास परियोजनाएं बहुउददेशीय परियोजनाएं होने के कारण देश में हरित क्रान्ति लाई है। भाखड़ा तथा जलाशयों ने क्षेत्रीय ऊर्जा एवं सिंचाई सुविधाओं, औद्योगीकरण में वृद्वि, बाढ़ से होने वाले विनाश से बचाव के कारण बांधो को डाउनस्‍ट्रीम क्षेत्रों मे पारिस्थितिक सुधार आदि द्वारा भाखड़ा ब्‍यास प्रबन्‍ध बोर्ड परियोजना क्षेत्र में सामाजिक-आर्थिक उन्‍नति लाई हैं।
हरित एवं औद्योगिक क्रान्ति

बीबीएमबी ने पर्यावरणीय घटकों के निर्माण के बाद की स्थिति और इसके प्रभाव यदि कोई हो, का अध्‍ययन तथा मूल्‍यांकन करना प्रारम्‍भ किया हैं, ताकि इन्‍हे कम करने के लिए अल्‍पकालिक एवं दीर्घकालीन उपाय किए जा सके।

बीबीएमबी पेयजल, गंदे जल, ठोस अवशिष्‍ट प्रबन्‍ध, चिकित्‍सालय अवशिष्‍ट आदि के सम्‍बन्‍ध में अपने प्रबन्‍ध अधीन सभी परियोजना कालोनियों केी पर्यावरणीय स्थिति का मूल्‍यांकन भी कर रहा है और उसमें सुधार भी कर रहा हैं।

बीबीएमबी प्रत्‍येक वर्ष भाखड़ा ब्‍यास प्र‍बन्‍ध बोर्ड की अतिरिक्‍त भूमि पर वृक्षारोपण कार्यक्रम द्वारा पारिस्थितिकी वातावरण में सुधार कर रहा है और परियोजना स्‍थलों पर अपनी बागवानी शाखाएं विकसित करके जलाशयों, परियोजना कालोनियों के सीमावर्ती क्षेत्रों में उद्यान टैरेस का रख रखाव कर रहा हैं।